चंडीगढ़: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के महत्व पर जोर देने और इसे और अधिक सुचारू बनाने के उद्देश्य से आज यहां सेक्टर 26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एम.जी.एस.आई.पी.ए.) में एक सेमिनार आयोजित किया गया।
पी.डी.एस. सुधार, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी और पोर्टेबिलिटी पर केंद्रित इस सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने लाभार्थियों के लाभ के लिए पी.डी.एस. को और मजबूत बनाने हेतु अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।
चर्चा का नेतृत्व करते हुए पंजाब राज्य खाद्य आयोग (पी.एस.एफ.सी.) के चेयरमैन श्री बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि पी.डी.एस. संबंधी जमीनी स्तर पर फीडबैक लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस प्रणाली की व्यापक समीक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने भविष्य के सुधारों के लिए फीडबैक पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी कही। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की फील्ड टीम की प्रशंसा करते हुए चेयरमैन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अहम हिस्सा बताया।
अपने विचार साझा करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. अंजुमन भास्कर ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एन.एफ.एस.ए.), 2013 की जानकारी दी। अतिरिक्त निदेशक ने अंत्योदय अन्न योजना (ए.ए.वाई.) और प्राथमिकता वाले परिवार (पी.एच.एच.) योजनाओं के बारे में भी बताया, जिसमें प्राथमिकता वाले परिवार योजना के तहत लाभार्थियों को 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह गेहूं मिलता है, जबकि अंत्योदय अन्न योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 35 किलो गेहूं प्रति माह मिलता है।
अधिक जानकारी देते हुए डॉ. अंजुमन भास्कर ने बताया कि एन.एफ.एस.ए. के तहत लाभार्थियों को राशन का वितरण 2023 से त्रैमासिक आधार पर किया जा रहा है। एन.एफ.एस.ए. के तहत 39,74,000 राशन कार्ड कवर किए गए हैं और लाभार्थियों की संख्या 1.36 करोड़ है। राशन कार्डों की 100 फीसदी आधार सीडिंग हो चुकी है। राज्य में 14,450 उचित मूल्य की दुकानें (एफ.पी.एस.) हैं जो लाभार्थियों को अनाज वितरित करती हैं।
विभाग द्वारा किए गए डिजिटल और तकनीकी सुधारों के बारे में अतिरिक्त निदेशक ने बताया कि राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, इसके अलावा आधार-सक्षम पी.डी.एस. पद्धति और फीस्ट (FEAST) नाम का एक पोर्टल है जो मंडियों से गोदामों और आगे उचित मूल्य की दुकानों तक अनाज की आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करता है। गेहूं के वितरण के लिए ई-पोस मशीनों के माध्यम से 100 फीसदी बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाता है। अब नए राशन कार्डों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है।
जहां तक ई-केवाईसी का संबंध है, जून 2024 से जून 2026 तक 1.35 करोड़ लाभार्थियों संबंधी यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
मेरी रसोई योजना के संबंध में, मई 2026 माह में लगभग 36.72 लाख किट वितरित की गई हैं। जुलाई से सितंबर 2026 तक दूसरी तिमाही के लिए वितरण 8 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक किट में मासिक उपभोग के लिए दो किलो दाल, दो किलो चीनी, एक किलो नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर और एक लीटर सरसों का तेल शामिल है।
पी.एस.एफ.सी. सदस्य चेतन प्रकाश धालीवाल और विजय दत्त ने अपने फील्ड दौरों के अनुभव साझा किए। इस मौके पर पी.एस.एफ.सी. सदस्य जसवीर सिंह सेखों ने पी.डी.एस. के आम लोगों पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव की विवेचना की।
श्री विजय दत्त द्वारा पी.डी.एस. लाभार्थियों से सीधा संपर्क करके उनकी फीडबैक लेने के लिए एम.जी.एस.आई.पी.ए. (मैग्सीपा) कार्यालय में आयोग का केंद्रीकृत कंट्रोल एंड कमांड सेंटर बनाने के सुझाव के जवाब में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रमुख सचिव श्री राहुल तिवारी ने पूरी सहमति व्यक्त की और लाभार्थियों तक पहुंच बनाने के लिए एस.एम.एस. सुविधा वाली आई.वी.आर. प्रणाली लगाने पर भी जोर दिया।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक श्री वरिंदर कुमार शर्मा ने पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में पी.एस.एफ.सी. द्वारा निभाई जा रही सराहनीय सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि पी.एस.एफ.सी. के गठन का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र फीडबैक लेना था।
इस अवसर पर आई.डी.सी. चंडीगढ़ से जे.एस. बेदी और अमृतसर से डॉ. सतीश वर्मा ने पी.डी.एस. में डिजिटलीकरण पहलों की प्रशंसा की और जमीनी स्तर की गतिविधियों की निगरानी के अलावा पी.डी.एस. के तहत निर्बाध वितरण प्रक्रिया के लिए बहु-विभागीय समन्वय की वकालत की।
इस अवसर पर अच्छा कार्य करने वाले डिपो धारकों को प्रशंसा पत्र भी दिए गए।
‘सरकारी योजनाओं में पोषण को बढ़ावा देना’ विषय पर दूसरे सत्र में पी.एस.एफ.सी. के चेयरमैन ने कहा कि 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण का पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अपने हालिया विदेश दौरे के अनुभव साझा करते हुए चेयरमैन ने बताया कि उन्होंने मॉन्ट्रियल की मैकगिल यूनिवर्सिटी का दौरा करके वहां के विशेषज्ञों से बातचीत की। उन्होंने बायो-फोर्टिफिकेशन के पक्ष में तर्क दिए।
सरकारी फूड लैब की निदेशक रवनीत कौर ने बच्चों के लिए सही तरीके और सही समय पर पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुणवत्ता पक्ष की वकालत करते हुए पी.बी.टी.आई. से डॉ. अजीत कौर दुआ ने भोजन में विविधता लाने के अलावा प्रचुर मात्रा में प्रोटीन शामिल करने के महत्व पर जोर दिया।
पी.ए.यू. लुधियाना से डॉ. किरन बैंस ने कहा कि भोजन तैयार करते समय सुरक्षित और स्वच्छ परिस्थितियों को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, इसके अलावा पौष्टिक भोजनों के बारे में जागरूकता फैलाना भी जरू


























