झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी खबर सामने आई है। 21 अगस्त को पुलिस और JPSC-JSSC प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने 14 नामजद और 200 से ज़्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, FIR में JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेता कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रवींद्र पासवान समेत कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
JPSC-JSSC विरोध मार्च में क्या हुआ?
‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ के सदस्यों ने शुक्रवार को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) के ऑफिस तक विरोध मार्च निकाला। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के अपने फैसले का हाई कोर्ट में ठीक से बचाव न करके उनके साथ “धोखा” किया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, हजारीबाग और गिरिडीह में भी ऐसे ही विरोध प्रदर्शन हुए।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में हुई कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
मरांडी ने कहा, “झारखंड के गरीब, दलित और आदिवासी छात्रों की नौकरियों को बेचने के बाद भी JMM-कांग्रेस का मन नहीं भरा। उनके संघर्ष को कमजोर करने के लिए उन्होंने फूट डालने की कोशिश की, दबाव बनाया और परीक्षाएं रद्द करने का दिखावा किया। राहुल गांधी जी, आपका दोहरा रवैया देश के छात्रों के सामने बेनकाब हो जाएगा। ये छात्र आपकी और हेमंत सोरेन की तरह किसी विरासत के वारिस नहीं हैं। वे अपने अधिकार हासिल करके रहेंगे।”
झारखंड HC ने JPSC-JSSC की परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगाई
झारखंड हाई कोर्ट ने कल JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस फैसले से परीक्षा के जरिए चुने गए कुल 1,932 उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड HC ने JPSC परीक्षाओं को रद्द करने पर भी रोक लगा दी। अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की गई है।
राज्य सरकार ने पहले कथित अनियमितताओं के कारण 39 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और छह परीक्षाएं टाल दी थीं; इनमें हालिया भर्ती अभियान और कई पुरानी परीक्षाएं शामिल हैं। JPSC परीक्षाओं के जरिए चुने गए और अभी सरकारी नौकरी कर रहे कई उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी थी।
नियुक्त उम्मीदवारों का कहना है कि उन्हें कथित अनियमितताओं की जांच से कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य आपत्ति उस पूरी परीक्षा को रद्द करने को लेकर है, जिसके चयन प्रक्रिया के जरिए उन्हें नियुक्त किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि अगर गड़बड़ी साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन उम्मीदवारों के खिलाफ जिन्होंने एक वैध भर्ती प्रक्रिया के जरिए नौकरी हासिल की है।

























