NEET परीक्षा कराने का सिस्टम ‘पूरी तरह सुरक्षित, सेंध लगाना मुश्किल’, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

21

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि NEET-UG परीक्षा कराने का मौजूदा सिस्टम “फुल प्रूफ यानी पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य” है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है।

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फिजिक्स के पेपर का उदाहरण देते हुए कोर्ट को पूरी प्रक्रिया समझाई। मेहता ने बताया कि सबसे पहले, मॉडरेटर के कई ग्रुप मिलकर 500 सवालों का एक बैंक तैयार करते हैं। इस बैंक से, दूसरे मॉडरेटर चार अलग-अलग क्वेश्चन पेपर तैयार करते हैं, जिनमें से हर एक में 100 सवाल होते हैं। इसके बाद NTA के DG चार में से दो पेपर चुनते हैं . किसी को पहले से पता नहीं होता कि अंतिम पेपर कौन-सा होगा।

फिर इन पेपरों को CISF की सुरक्षा और CCTV की निगरानी में प्रिंटिंग के लिए एक सीलबंद बॉक्स में भेजा जाता है।

बॉक्स में डिजिटल की (key) होती है और एक्सेस कोड तभी मिल सकता है जब प्रेस का मालिक DG NTA से संपर्क करे। एक बार बॉक्स खुलने के बाद, किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर आने की इजाज़त नहीं होती और प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है।

3 मई को NEET UG का पेपर लीक होने के कुछ महीनों बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से UPSC जैसा मजबूत परीक्षा सिस्टम बनाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी समझने वाले अधिकारियों को शामिल करना चाहिए। साथ ही अनुभवी अधिकारियों के बार-बार ट्रांसफर से बचने की सलाह दी। बेंच ने मेहता को सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है।

सरकार ने NTA में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। परीक्षा टीम को नए सिरे से बनाया जाएगा और 600 एक्सपर्ट हटाए गए हैं। साइबर सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स और पेपर सेटिंग के निजी विशेषज्ञ जोड़े जाएंगे। 3 हफ्ते में 20-25 अधिकारी नियुक्त होंगे।