बाढ़ नियंत्रण फंड में पंजाब की अनदेखी! 3 साल में सिर्फ ₹1.65 करोड़, यूपी-बिहार को मिले करोड़ों

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चंडीगढ़: केंद्र सरकार की ओर से बाढ़ नियंत्रण और सीमावर्ती नदी प्रबंधन के लिए जारी किए जाने वाले फंड में पंजाब को बेहद कम हिस्सेदारी मिली है। लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान रिवर मैनेजमेंट एक्टिविटीज एंड बॉर्डर एरिया (RMBA) योजना के तहत पंजाब को केवल ₹1.65 करोड़ की केंद्रीय सहायता मिली। वहीं फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत पिछले तीन वित्त वर्षों के साथ-साथ चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी पंजाब को एक भी रुपया जारी नहीं किया गया।

सबसे अहम बात यह है कि 2026-27 में पंजाब को RMBA और FMP दोनों योजनाओं में केंद्र से कोई राशि नहीं मिली, जबकि इसी अवधि में कई अन्य राज्यों को करोड़ों रुपये की सहायता जारी की गई। इसके विपरीत अर्बन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत देश के 18 बड़े शहरों के लिए दो चरणों में ₹5,520 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

यूपी और बिहार समेत कई राज्यों को मिली बड़ी सहायता

लोकसभा में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश को ₹254.18 करोड़, मणिपुर को ₹242.25 करोड़, बिहार को ₹206.96 करोड़, असम को ₹114.18 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को ₹82.50 करोड़, उत्तराखंड को ₹81.69 करोड़, जम्मू-कश्मीर को ₹61.94 करोड़, हिमाचल प्रदेश को ₹43.94 करोड़ और पश्चिम बंगाल को ₹22.06 करोड़ की सहायता मिली। इन राज्यों की तुलना में पंजाब को केवल ₹1.65 करोड़ का आवंटन मिला, जो सूची में सबसे कम है।

पंजाब के लिए क्यों अहम है यह फंड?

पंजाब में सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर जैसी प्रमुख नदियां बहती हैं। राज्य का बड़ा इलाका हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव और नदी कटाव से प्रभावित होता है। पाकिस्तान सीमा से लगे कई जिलों में नदी तटबंधों, ड्रेनेज सिस्टम और कटाव रोकने से जुड़े कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि और ग्रामीण आबादी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में केंद्र से सीमित वित्तीय सहायता मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एफएमपी और आरएमबीए में क्या अंतर है?

फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम (FMP):

इस योजना के तहत तटबंध निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम, एंटी-इरोजन कार्य और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं के लिए राज्यों को केंद्रीय सहायता दी जाती है।

रिवर मैनेजमेंट एक्टिविटीज एंड बॉर्डर एरिया (RMBA):

यह योजना सीमावर्ती नदियों के प्रबंधन, नदी कटाव रोकने और सीमा क्षेत्रों में नदी संबंधी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।
इस बीच, केंद्रीय जल आयोग ने वर्ष 2025 से एआई आधारित बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल पर काम शुरू किया है, जबकि राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए फ्लड हैजर्ड एटलस तैयार किया है। इसके बावजूद पंजाब को बाढ़ प्रबंधन के लिए सीमित केंद्रीय सहायता मिलना राज्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।