पंजाब की समृद्धि को पुन: बहाल करने और राज्य को हरा-भरा बनाने के लिए हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए : स्पीकर कुलतार सिंह संधवां
चंडीगढ़: पर्यावरणीय स्थिरता और हरियाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब विधान सभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवां ने आज पंजाब विधान सभा परिसर में फलदार पौधे लगाए।
इस अवसर पर बोलते हुए स्पीकर संधवां ने बताया कि पंजाब विधान सभा में अब तक 40 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पंजाब को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और पौधे लगाने का यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा।
स्पीकर संधवां ने कहा, “यदि हम प्रकृति से प्रेम करेंगे, तो प्रकृति भी हमें वही प्रेम वापस करेगी।” उन्होंने वर्तमान समय में नियमित रूप से पौधे लगाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ‘ग्रीन पंजाब’ बनाने के लिए अब सभी को मिलकर काम करने का समय आ गया है।
स्पीकर ने आगे कहा कि सतत पर्यावरण को बढ़ावा देना समय की प्रमुख आवश्यकता है। आज अधिक से अधिक पेड़ लगाकर, हम आने वाली पीढ़ियों और सदियों को एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के तहत सुरक्षित रख सकते हैं।
उन्होंने पंजाब के लोगों से गुरबानी की मुख्य शिक्षाओं और सिख गुरुओं द्वारा दिखाए गए ऐतिहासिक मार्ग से गहरी आध्यात्मिक दिशा लेकर व्यापक पर्यावरण आंदोलन शुरू करने की पुरजोर अपील की। उन्होंने आगे कहा कि सच्ची दिव्यता प्रकृति में निवास करती है। प्रत्येक मानव, पशु, पौधा और पेड़ सर्वशक्तिमान की जीवंत अभिव्यक्ति है।
राज्य में घटते जा रहे पर्यावरणीय संतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पीकर ने बताया कि पंजाब का वन क्षेत्र घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जिसके लिए तत्काल सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाली और वनस्पति की कमी सामाजिक बुराइयों के बढ़ने से जुड़ी हुई है, जो शांति और समृद्धि को नष्ट करती है। प्रकृति की कद्र और संरक्षण पूरे समुदाय के लिए दिव्य कृपा, समृद्धि और आशीर्वाद सुनिश्चित करता है।
स. संधवां ने बताया कि हमें छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी से दिशा लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने स्वयं बाग़ लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। यदि हम पंजाब को पुनः रंगीन और जीवंत बनाना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले राज्य को हरा-भरा पंजाब बनाना होगा।
उन्होंने समस्त पंजाबियों से अपील की, “जहाँ भी और जब भी अवसर मिले, आओ सभी एकजुट होकर पेड़ लगाएँ।” उन्होंने आगे अपील की कि सभी नागरिक प्रकृति से जुड़ी अपनी पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि पंजाबी सतत पर्यावरण सुनिश्चित कर सकते हैं, जहाँ प्रकृति फले-फूलेगी और आने वाली पीढ़ियाँ पेड़ों के तहत क्षेत्र को बढ़ाकर समृद्ध होंगी।

















