किर्गिस्तान के बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और थोड़ी देर बातचीत की।
दोनों नेताओं ने पहले अन्य नेताओं के साथ ग्रुप फ़ोटो खिंचवाई और इसके बाद वो बातचीत करते नजर आए। नेताओं के बीच यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें चीनी राष्ट्रपति के शामिल होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
इस बीच, आज SCO समिट को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि आतंकवाद के मामले में दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। पाकिस्तान के अपने समकक्ष शहबाज़ शरीफ़ की मौजूदगी में PM मोदी ने कहा, “हमें आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा – जिसमें उसकी फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं।” उन्होंने युद्ध के बजाय कूटनीति पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता; सभी युद्धों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।”
एससीओ में कुल 10 सदस्य देश बेलारूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसके अलावा, संगठन के दो पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) देश अजरबैजान और आर्मेनिया हैं।
इस समूह की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जो SCO का हिस्सा नहीं है। अफगानिस्तान और मंगोलिया के पास ऑब्जर्वर का दर्जा है, जबकि बातचीत करने वाले साझेदारों में तुर्की, अजरबैजान और सऊदी अरब शामिल हैं।























