पंजाब राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की समीक्षा बैठक हुई; स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए रूप-रेखा तैयार की

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  • – मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार सम्मानजनक, किफायती और बिना भेदभाव के मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध
  • – सभी निजी मनोचिकित्सा क्लीनिकों और नर्सिंग होमों/अस्पतालों के लिए एस.एम.एच.ए. के अधीन पंजीकरण कराना अनिवार्य
  • – मनोचिकित्सा केंद्रों में बांधने, एकांतवास और बिना संशोधित ई.सी.टी. जैसे अमानवीय कृत्यों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के आदेश

चंडीगढ़: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को नई दिशा देने के लिए हाल ही में 11 गैर-सरकारी सदस्यों को शामिल करने के उपरांत नवगठित पंजाब राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एस.एम.एच.ए.) की समीक्षा बैठक आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह की उपस्थिति में हुई।

प्रमुख सचिव-कम- चेयरमैन (एक्स-ऑफिसियो) कुमार राहुल और डायरैक्टर स्वास्थ्य सेवाएं पंजाब-कम-सदस्य (एक्स-ऑफिसियो) डॉ. हितिंदर कौर के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए, स्वास्थ्य मंत्री ने नव-नियुक्त एक्स-ऑफिसियो और गैर-सरकारी सदस्यों का औपचारिक स्वागत किया, इनमें से कई सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

इस व्यापक पैनल में विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, साइकियाट्रिक सोशल वर्कर, मानसिक स्वास्थ्य नर्सें, एन.जी.ओ. के प्रतिनिधि, देखभाल करने वाले और मानसिक बीमारी का सामना कर चुके व्यक्ति शामिल हैं, ताकि जमीनी वास्तविकताओं के आधार पर राज्य नीति तैयार की जा सके।

प्राधिकरण को संबोधित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने दोहराया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (एमएचसीए) 2017 के उद्देश्य को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मानक मनोवैज्ञानिक सेवाओं तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने आगे कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल संस्थान अकेले काम नहीं कर सकते और यह पुनर्जीवित प्राधिकरण सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी क्लीनिकों में सेवाओं की निगरानी करने, सख्त मानकों को लागू करने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में काम करेगा।

डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब के सभी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में गैर-कानूनी और गैर-मानवीय प्रथाओं पर रोक लगाने के सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने चेतावनी दी कि मरीजों को बांधना, एकांतवास में रखना और एनेस्थीसिया या मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं के अलावा इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी) देना कानूनी तौर पर सख्त वर्जित है और ऐसा करने पर गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान पंजाब राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण नियमों और पंजाब मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों के अधिकार) नियमों को अधिसूचित करने और लागू करने पर भी चर्चा की गई, जिन्हें केंद्र सरकार से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। यह दृढ़ संकल्प लिया गया कि राज्य में चल रहे सभी 83 निजी मनोवैज्ञानिक नर्सिंग होमों और क्लीनिकों के लिए अधिनियम की धारा 65 अनुसार एसएमएचए के अधीन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बैठक में माननीय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए कम्युनिटी ग्रुप होम चलाने के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए 6 एन.जी.ओ.-संचालित मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की आरजी रजिस्ट्रेशन पर भी विचार किया गया।

इस बैठक में चिकित्सा शिक्षा, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, समाज कल्याण और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ एक्स-ऑफिसियो प्रतिनिधियों के साथ-साथ नव नामित गैर-सरकारी सदस्यों ने भी भाग लिया।