चंडीगढ़: लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के मद्देनजर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज डायरेक्टोरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीएचएस) में उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य राज्य भर में वेक्टर-जनित और जल जनित बीमारियों की रोकथाम और बचाव के लिए किए जा रहे उपायों का जायजा लेना था।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री के साथ प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) कुमार राहुल, पंजाब विकास आयोग के सदस्य अनुराग कुंडू, विशेष सचिव (स्वास्थ्य) एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एम.डी. साक्षी साहनी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. हितिंदर कौर और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (परिवार कल्याण) डॉ. अदिति सलारिया मौजूद थीं। इसके अलावा उप निदेशक डॉ. रोहिणी गोयल, सहायक निदेशक डॉ. मनमीत कौर और स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. अर्शदीप कौर भी हाजिर थीं। जबकि उपायुक्त, सिविल सर्जन और जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट (महामारी विज्ञानी) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शिरकत की।
बीमारी संबंधी आंकड़ों की समीक्षा करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि समय रहते किए गए रोकथाम उपायों की बदौलत पंजाब में इस साल, अब तक डेंगू से कोई भी मौत नहीं हुई है। 21 सितंबर तक कुल 1,00,414 डेंगू के नमूनों की जांच की गई है (जिनमें से 64,049 नमूनों की जांच आम आदमी क्लीनिकों में की गई), जिसमें पॉजिटिविटी दर काफी कम यानी 0.45 प्रतिशत (451 पॉजिटिव केस) दर्ज की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने अमृतसर और जालंधर द्वारा डेंगू की जांच करने में दिखाई गई सक्रिय कार्यशीलता की सराहना की। उन्होंने इस साल राज्य में सामने आए चिकनगुनिया के 16 केसों की स्थिति का भी जायजा लिया।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सिर्फ डेंगू के केसों का पता लगाना अब हमारी प्राथमिकता नहीं है, बल्कि हम डेंगू के लार्वा की सक्रिय रूप से पहचान करके उसे खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।” उन्होंने उपायुक्तों और स्वास्थ्य अधिकारियों को नियमित जांच करने के लिए कहा और हिदायत की कि एपिडेमियोलॉजी टीमों द्वारा फील्ड निगरानी और पहचाने गए डेंगू हॉटस्पॉट के नियमित दौरे किए जाएं, और फॉलो-अप प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए।
विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए मंत्री ने जिलों को हिदायत की कि मच्छरों के पैदा होने वाले स्रोतों की पहचान करने और उन्हें खत्म करने के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने के लिए आशा वर्करों और नर्सिंग विद्यार्थियों की सेवाएं ली जाएं। उन्होंने गांव स्तर पर ‘गांव स्वास्थ्य, सफाई और पोषण समितियों’ (वीएचएसएनसी) की सक्रिय रूप से बैठकें करने के लिए भी निर्देश दिए। इन वर्करों की अहम भूमिका को मान्यता देते हुए मंत्री ने कहा कि घर-घर जाकर सर्वेक्षण का काम करने के बदले आशा वर्करों को उचित भुगतान और प्रोत्साहन भत्ते दिए जा रहे हैं।
एंटी-डेंगू गतिविधियों में नर्सिंग विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए फरीदकोट जिले की सराहना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने अन्य जिलों को भी विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट और तरन तारन सहित अधिक केसों वाले जिलों में वी.एच.एस.एन.सी. बैठकों, क्षेत्रीय निरीक्षणों और आशा वर्करों की भागीदारी के विशेष निर्देश जारी किए। मंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को आवश्यकता अनुसार घरों के अंदर और बाहर फॉगिंग करने के लिए भी कहा।
जल जनित बीमारियों पर ध्यान देते हुए, मंत्री ने दस्त, हैजा और हैपेटाइटिस की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को पानी की गुणवत्ता पर सख्त नजर रखने, पीने के पानी के स्रोतों की नियमित जांच करने, लीक हो रही पाइपलाइनों या दूषित सप्लाई लाइनों को तुरंत ठीक करने और सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ओआरएस, आईवी फ्लूइड्स, क्लोरीन की गोलियों और जरूरी दवाओं का पर्याप्त भंडार तैयार रखने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ (एमएमएसवाई) कार्डों के वितरण का भी जायजा लिया। उन्होंने सभी उपायुक्तों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को गांव और मोहल्ला स्तर पर एमएमएसवाई कार्डों का सुचारू ढंग से वितरण करने के लिए कहा।
डॉ. बलबीर सिंह ने सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने और नागरिकों को बीमारी के स्रोतों को खत्म करने संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने की अपील की: “बीमारियों की रोकथाम की सफलता सामुदायिक भागीदारी और जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। आस-पास की सफाई सुनिश्चित करके और खड़े पानी की जांच करके, हम सब मिलकर पंजाब को स्वस्थ और बीमारी-मुक्त रख सकते हैं।”

























