महिला आरक्षण पर बढ़ा टकराव: प्रियंका गांधी ने सरकार को दी चुनौती, INDIA गठबंधन PM मोदी को लिखेगा पत्र

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18 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Politics Desk: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर महिलाओं के अधिकारों को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार से पुराना महिला आरक्षण विधेयक दोबारा संसद में लाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुराने विधेयक को सभी दलों का समर्थन प्राप्त था और उसे बिना किसी विवाद के पारित किया जा सकता है।

शनिवार को संसद के विशेष सत्र के आखिरी दिन से पहले मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार को सोमवार को संसद बुलाकर पुराना विधेयक पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा करती है, तो विपक्ष उसका पूरा समर्थन करेगा और तभी यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तव में महिला विरोधी कौन है।

इस बीच सूत्रों के अनुसार, INDIA गठबंधन भी महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे पुराने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार नए बिल के जरिए देश की राजनीतिक संरचना बदलना चाहती थी।

सूत्रों के मुताबिक, INDIA गठबंधन की बैठक में यह फैसला लिया गया कि देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएंगी। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष यह संदेश देगा कि वह महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की मंशा के खिलाफ है।

प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को सोशल Media पर भी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलना उनका अधिकार है और इसे किसी भी हालत में रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने लोकतंत्र की रक्षा की है और अगर यह विधेयक पारित हो जाता, तो देश की राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था।

शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर करीब 21 घंटे चर्चा हुई थी। वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, लेकिन इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे। इसी कारण यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया।