चंडीगढ़: पंजाब राज्य सूचना आयोग द्वारा प्रकाशित तथा पंजाब के राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू द्वारा लिखित पुस्तक ‘आरटीआई एंड गुड गवर्नेंस’ आज लोक भवन, चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया को भेंट की गई।
यह पुस्तक पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त इंद्रपाल सिंह धन्ना ने राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू तथा सुशासन के अतिरिक्त मुख्य सचिव डी.के. तिवारी, आईएएस की उपस्थिति में राज्यपाल को भेंट की।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के लागू होने के 21 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समर्पित यह पुस्तक पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक सशक्तीकरण और सुशासन के महत्व पर प्रकाश डालती है। इसमें पुलिस एवं लोक प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नागरिकों की जागरूक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में सूचना के अधिकार (आरटीआई) की बदलती भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
पंजाब के राज्यपाल को यह पुस्तक भेंट करना सूचना के अधिकार अधिनियम के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने तथा पारदर्शी, जवाबदेह और सुशासन-आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने पुस्तक ‘आरटीआई एंड गुड गवर्नेंस’ की सराहना की। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देने तथा सूचना के अधिकार की संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में पंजाब राज्य सूचना आयोग के इस सकारात्मक प्रयास की प्रशंसा की।
इस पुस्तक में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया तथा भारत के मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल, पूर्व आईएएस के महत्वपूर्ण संदेश शामिल हैं। इन संदेशों के माध्यम से पुस्तक के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक महत्व को रेखांकित किया गया है। इसके अतिरिक्त, भारत के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह तथा पंजाब के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त राजन कश्यप ने भी पुस्तक की सराहना की है।
पंजाब राज्य सूचना आयोग के संरक्षण में राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू द्वारा लिखित यह पुस्तक जनजागरूकता बढ़ाने, सूचना के अधिकार से संबंधित व्यवस्थाओं के जिम्मेदाराना क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करने तथा सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराती है।
यह आयोजन पिछले 21 वर्षों के दौरान सूचना के अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी उपलब्धियों की समीक्षा करने के साथ-साथ व्यापक जनहित में इसके प्रावधानों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी रहा।



























