INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मू से की मुलाक़ात, राहुल बोले- राष्ट्रपति ने वोट चोरी से इनकार नहीं किया:हमसे सबूत मांगे

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INDIA ब्लॉक के नेताओं के 10 सदस्यों के एक डेलीगेशन ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और कथित चुनावी गड़बड़ियों पर दखल देने की मांग करते हुए चार पॉइंट का एक मेमोरेंडम सौंपा, जिसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को हटाना भी शामिल है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि वह हैरान हैं कि राष्ट्रपति ने ‘चुनाव चोरी’ के आरोप से इनकार नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात को “मान लिया”। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने नेताओं से ‘वोट चोरी’ का सबूत मांगा और INDIA ब्लॉक के पास जो सबूत हैं, वे उन्हें तब सौंप देंगे जब वह उन्हें मानने के लिए तैयार होंगी।

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े, वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को रोकने, दोबारा पेपर बैलेट सिस्टम लागू करने और पिछले दो सालों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की गई है, जिनमें विपक्ष का दावा है कि “वोट चोरी” के सबूत मिले हैं।

यह बैठक तब हुई जब विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें विजय चौक पर रोक दिया। कई नेताओं ने वहीं बैठकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने के लिए आगे बढ़ गया।

डेलीगेशन में कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) चीफ ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, NCP (SP) लीडर सुप्रिया सुले, RJD MP मनोज झा, VCK चीफ थोल थिरुमावलवन, IUML लीडर ई टी मोहम्मद बशीर, CPI(M) जनरल सेक्रेटरी एम ए बेबी और CPI जनरल सेक्रेटरी डी राजा शामिल थे।

INDIA गठबंधन की चार मांगें
अपने ज्ञापन में, INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति मुर्मू से दखल देने और यह पक्का करने की अपील की कि उनकी मांगों पर बिना देरी के कार्रवाई हो। ज्ञापन में बताई गई चार मांगें ये हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा और 2023 के उस कानून को रद्द करना जो CEC और चुनाव आयुक्तों (ECs) को आजीवन सुरक्षा (इम्युनिटी) देता है।
SIR को तुरंत सस्पेंड करना और वोटर लिस्ट से गैर-कानूनी तरीके से हटाए गए सभी 13.30 करोड़ वोटरों के नाम तुरंत बहाल करना।
सभी चुनावों में फिर से पेपर बैलेट का इस्तेमाल शुरू करना।
पिछले दो सालों में हुए उन सभी विधानसभा चुनावों को रद्द करना जिनमें वोट चोरी के पक्के सबूत पेश किए गए हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के पास इसलिए गया क्योंकि जब दूसरे सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तो भारत के लोग संविधान के अंतिम संरक्षक के तौर पर उनके कार्यालय की ओर देखते हैं।