बुध ग्रह को स्ट्रांग बनाने का आसान उपाय—जानें बुध चालीसा का महत्व

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26 नवंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

Rashifal Desk: ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, वाणी और व्यापार का सूचक माना गया है। शुभ ग्रहों के साथ स्थित होने पर बुध अत्यंत सकारात्मक फल देता है, जबकि अशुभ ग्रहों के साथ होने पर इसका प्रभाव कमजोर हो जाता है। कमजोर बुध से व्यक्ति को बोलने में कठिनाई, निर्णय लेने में संकोच, और व्यापार तथा संवाद से जुड़े मामलों में रुकावट जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

मान्यता है कि बुधवार के दिन ‘बुध चालीसा’ का पाठ करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। बिना किसी बड़े उपाय के केवल इस चालीसा का नियमित पाठ भी शुभ फल प्रदान करता है। आइए पढ़ते हैं श्री बुध देव की पावन चालीसा—

श्री बुध चालीसा (Budh Chalisa in Hindi)
॥ दोहा ॥

नमो नमो जय श्री बुध राजा,
करहु कृपा मोहि जानि कायर अधम का।

करहु कृपा कृपानिधि बुध सदा सहाय,
रोग दोष दुख हरो अनाथ के नाथ॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति बुध देव दयाला,
सदा करत जो सुकृत प्रतिपाला।

जटा मुकुट सिर शोभित भारी,
त्रिपुण्ड चंदन रेखा प्यारी।

गरल कनठ सर्प जग माला,
नाग कंकन कर मंडित भाला।

ब्रह्म रूप वर शुभ्र सरीरा,
करत सदा जन कल्याण अधीरा।

श्वेत कमल आसन मन भावा,
संत करत सदा मंगल ध्यावा।

कुंजल बिराजत छवि नयनी,
अति मनोहर मंगल गुण खानी।

काटत पातक पंक भरारा,
बुध ग्रह दुष्ट नरक संसारा।

सुख सृखावत सब फल साता,
रोग दोष संकट हरण विधाता।

बुध की महिमा अपरंपारा,
किया जानि मनुज दुख निवारा।

लाख के वचन धरत दर साता,
रोग हरण बुध दया विहाता।

ग्रह अनिष्ट जो नर पर छाए,
रोग दोष भय मिटे न जाए।

तिन्ह पर बुध अनुग्रह होई,
काटि देय सब संकट मोही।

जनम जनम के पातक भारी,
काटि देय सब बुध मति तारी।

सुर नर मुनि नित्य गुण गावे,
यश गावत बुध सुख पावे।

रोग दोष संकट सब हारी,
धरहु धीर बुध हरहु पाप भारी।

नित नव मंगल करत सवारी,
रोग दोष बुध हरहु भारी।

अधम कायर मतिहीन हमारा,
करहु कृपा बुध हरो दुख सारा।

सुख संपत्ति दै करहु उपाई,
जन मन रंजन मंगल लाई।

बुध सुधि शील रूप सुहावा,
संत ध्यावत मंगल भावा।

विनय करौं बुध देव तुम्हारी,
संकट हरो हे पातक भारी।

अधम कायर सुबुद्धि सुधारा,
करहु कृपा हरो दुख सारा।

महा संकट में तिन्हें उबारो,
अधम कायर सुबुद्धि सुधारो।

हरहु पाप बुध महा विधाता,
सुर नर मुनि सदा शुभ गाता।

बुध की महिमा अपार पावे,
अधम कायर सब संकट हरे।

जयति जयति बुध देव सहाय,
कृपा करहु हरहु सब भय।

॥ दोहा ॥

नमो नमो जय बुध सुखकारी,
दुख दारिद्र्य मिटाओ भारी।

यह चालीसा बुध ग्रह का पाठ,
करहु कृपा बुध हरो सब कष्ट।

॥ इति संपूर्णम् ॥