सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली HC से याचिका वापस ली; हिरासत बढ़ाने के फैसले को दी थी चुनौती

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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली। नेताओ ने जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में हिरासत में लिए जाने और एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी थी। बता दें कि जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और बैरिकेड तोड़ा।

कोर्ट ने इन दोनों को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, लेकिन मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।

हालांकि, हाई कोर्ट ने दास और रांका से कड़ी पूछताछ की। कोर्ट ने उनकी उम्र पूछी और इस बात पर जोर दिया कि वे ‘जेन जेड’ (Gen Z) पीढ़ी का हिस्सा नहीं हैं। कोर्ट को बताया गया कि दास 27 साल के हैं और रांका 31 साल के हैं, जबकि 1997 के बाद पैदा हुए लोगों को ‘जेन जेड’ माना जाता है।

हाई कोर्ट ने माना कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनावों के जरिए होता है। इसके अलावा, अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने दास और रंका के प्रति नरमी बरती थी।

गौर हो कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के पहले दोनों नेताओं दास और रांका को हिरासत में ले लिया था। दोनों को शांति भंग नहीं करने की शर्त के साथ जमानत मिली थी। इसी दौरान सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है। इसके बावजूद सौरव- आशुतोष 13 अक्टूबर को तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

14 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत खत्म हुई थी, जिसके बाद उनकी कस्टडी 2 दिन के लिए बढ़ा दी गई। दोनों ने इसी के खिलाफ याचिका लगाई थी।

सौरव-आशुतोष के खिलाफ दोनों केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर

दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं से जुड़े जंतर-मंतर मामले को भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस में दर्ज केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।