शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने चंडीगढ़ इकाई लॉन्च की, नगर निगम और 2029 लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान

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चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने शनिवार को अपनी चंडीगढ़ इकाई का औपचारिक शुभारंभ करते हुए आगामी चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। पार्टी ने इसके साथ ही चंडीगढ़ के लिए अपना राजनीतिक एजेंडा भी जारी किया और समान विचारधारा वाले दलों के साथ संभावित गठबंधन की पुष्टि की।

पार्टी के महासचिव और चंडीगढ़ प्रभारी गुरजीत सिंह तलवंडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी का पुनर्गठन श्री अकाल तख्त साहिब के 2 दिसंबर 2024 के हुकमनामे के अनुरूप किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में संगठन को मजबूत किया जा रहा है और जल्द ही चंडीगढ़ की पूरी संगठनात्मक संरचना घोषित की जाएगी।

तलवंडी ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में चंडीगढ़ के अकाली कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा हुई। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में कार्यकर्ता या तो निष्क्रिय हो गए या अन्य राजनीतिक दलों में चले गए।

उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी चंडीगढ़ में चुनावी गठबंधन के लिए समान विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ बातचीत कर रही है। हालांकि गठबंधन केवल साझा न्यूनतम कार्यक्रम और जनहित के मुद्दों के आधार पर ही किया जाएगा।

पार्टी ने चंडीगढ़ के लिए अपना विजन डॉक्यूमेंट भी जारी किया। इसमें पंजाबी को चंडीगढ़ की आधिकारिक भाषा का दर्जा, 60:40 अनुपात में प्रशासनिक पदों की भर्ती, ₹30,000 से कम मासिक आय वाले परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 30,000 लीटर मुफ्त पानी, भूमि पूलिंग नीति, औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंडों को फ्रीहोल्ड करने, एमएसएमई को बढ़ावा देने तथा सेक्टर-17 को यूरोपीय शैली के शॉपिंग विलेज के रूप में विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

पार्टी ने चंडीगढ़ को “24 घंटे चलने वाला शहर” बनाने का लक्ष्य भी रखा है। इसके तहत हवाई अड्डे के विस्तार, रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के आधुनिकीकरण तथा विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाओं के विकास का वादा किया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई वरिष्ठ अकाली नेता मौजूद रहे। पार्टी ने चंडीगढ़ के लोगों, पंथिक संगठनों और ग्राम प्रतिनिधियों से अपने अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि शहर को मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता है।